गुरु पूर्णिमा पर हार्दिक शुभकामनाएँ
गुरु का हर इक वचन अनूठा
अंधकार मन का हर लेता,
गुरु का दर्शन कितना पावन
शिष्य सहज ख़ुद को पा लेता !
गुरु हर जगह ईश को देखे
नित अनेक में एक देखता,
उस परम के सान्निध्य में रह
पल-पल वह आनंदित रहता !
परम सुरभि से महक रहा जग
उसी की आभा से प्रकाशित
अद्भुत महिमा वह ही जाने
शिष्य ओर भी सदा प्रवाहित
जग को इक आभास समझता
स्वप्न निशि का, भोर का तारा
ना जाने कितने युग बीते
चलता आता सदा पसारा !
साक्षी है वह हर इक युग का
गुरु अनंत शक्ति से जुड़ा है,
उसे भी निज रूप में ढाले
जो भी उसकी ओर मुड़ा है !
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