बुधवार, दिसंबर 21

कान्हा बंसी किसे सुनाए

कान्हा  बंसी किसे सुनाए


वरदानों से झोली भर दी 

पर हमने क़ीमत कब जानी, 

कितनी बार मिला वह प्रियतम 

किंतु कहाँ सूरत पहचानी !


आस-पास ही डोल रहा है 

जैसे मंद पवन का झोंका, 

कैसे कोई परस जगाए 

बंद अगर है हृदय झरोखा !


रुनझुन का संगीत बज रहा 

पंचम  सुर में कोकिल गाए, 

कानों में है शोर जहाँ का 

कान्हा  बंसी किसे सुनाए !


एक नज़र करुणा से भर के 

दे देती प्रकृति पुण्य प्रतीति, 

राहों के पाहन चुन-चुन कर 

जीवन में मधुरिम रव भरती !


अमर  अनंत धैर्यशाली वह 

हुआ सवेरा जब जागे तब,

आनंद लोक निमंत्रण देता 

लगन लगे मीरा वाली जब !




4 टिप्‍पणियां:

  1. वरदानों से झोली भर दी

    पर हमने क़ीमत कब जानी,

    कितनी बार मिला वह प्रियतम

    किंतु कहाँ सूरत पहचानी !
    .. बहुत सुंदर रचना ।

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  2. सूरत कान्हा के मायाजाल में कहाँ जानी जाती है ... मीरा जैसी लगन लगाना मीरा के ही बस में है ...

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