शुक्रवार, जनवरी 23

वसंत पंचमी

वसंत पंचमी  



खिले कुसुम महकी अमराई 

  मधु वासंती पवन बही है,  

ऋतुराजा का स्वागत करने 

 क़ुदरत सारी निखर रही है !


 सरसों फूली खलिहानों में 

कण-कण जीवंत हुआ भू का, 

 प्रीत जगाये रस अंतर में

नव उमंग नव भरे ऊर्जा ! 


सृष्टि में संगीत संजोने 

स्वरदेवी का हुआ अवतरण, 

कर वीणा तारों को झंकृत 

ज्ञान ज्योति का किया प्रस्फुटन !


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