77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर
भारत भू की गौरव गाथा
आज सुनाने का दिन आया,
संविधान का पर्व मनाते
जिसको इस दिन था अपनाया !
पावन संस्कृति अति पुरातन
विश्व साथ दे हर उत्सव में,
भजन क्लबिंग कर युवा आज के
भक्तिभाव जगायें उर में !
वन्य प्रांत भी बढ़ता जाता
नदियाँ भी नव जीवन पाएँ,
अक्षय ऊर्जा का प्रयोग कर
ग्लोबल वार्मिंग नित घटाएँ !
उत्तर दिशा विराट हिमालय
सागर तट सुंदर दक्षिण में,
भारत की सीमाएँ सुरक्षित
मार्ग दिखाता नवाचार में,
जहाँ कहीं भारतवासी हों
विजयी तिरंगा जब फहराते,
बहे अटूट प्रेम की धारा
अनायास ही दिल जुड़ जाते !
विकसित राष्ट्र की नींव डल रही
दूर बहुत अभी जाना है,
पाएँ सभी अधिकार समान
यही मूल्य नित अपनाना है !
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आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर सोमवार 26 जनवरी 2026 को लिंक की गयी है....
जवाब देंहटाएंhttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
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बहुत बहुत आभार रवींद्र जी !
हटाएंशुभकामनाएं |
जवाब देंहटाएंस्वागत व आभार!
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