वासंतिक नवरात्र आ गये
माँ के आने की बेला है
घर में मंगल कलश बिठाओ,
धूप-दीप, फूलों से स्वागत
द्वारे बंदनवार सजाओ !
माँ जो भीतर कण-कण में हैं
गहरी अंतर प्यास जगाओ,
प्राणों का आधार वही हैं
देवी माँ का ध्यान लगाओ !
क्षुधा रूप में, भक्ति रूप में
शिव शक्ति और शांति रूप में,
मन की बात कहे बिन सुनतीं
माँ हैं दिल की गहराई में !
वही सप्त चक्रों में बैठी
चिंतन, सृजन, प्रेम की देवी
वही ज्ञान की देवी बनकर
अंतर को सद्प्रेरित करतीं !
माँ के रूप हज़ारों चाहे
मन में कोई रूप बसाओ,
वह अनंत की राह दिखायें
जीवन में समरसता लाओ !
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जय माँ अंबे 🙏 भक्तिभाव पूरित सरस सुंदर वंदन
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