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शनिवार, मई 23

वह

 वह

भूल कर भी दिल से वह जाता नहीं 
बिन बुलाये घर में जो आता नहीं 

गूँजती है धुन उसकी बांसुरी की 
जय के नगमे जो कभी गाता नहीं 

भर रहा चुपचाप ही कई झोलियाँ 
उससे बढ़कर दूसरा दाता नहीं 

गोपियों से पूछकर जरा देख लो 
बिन गोविंदा ब्रज जिन्हें भाता नहीं