भारत का हर पर्व अनोखा
लोहरी की पावन अग्नि में
सपनों के शुभ रंग बिखरते,
देश तरक़्क़ी करे विश्व सँग
भारतवासी यही माँगते !
सबको साथ लिए चलना है
वसुंधरा है एक परिवार,
भारत का हर पर्व अनोखा
जगा रहा हर हृदय में प्यार !
मिलकर आज पतंग उड़ाएँ
वितरण किए तिल गुड़ मिष्ठान,
खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण करें
चिवड़ा दही लगते पकवान !
थोड़े में ही सुख मिलता है
सिखा रहा पोंगल, बीहू भी,
फसल काटने की ऋतु आयी
व्यक्त करें आभार कृषक भी !
सारा भारत इक ही सुर में
पर्व मकर संक्रांति मनाए,
धरती, सूरज, वनस्पति संग
मानव मिल सुर-ताल मिलाए !
संस्कृति है यह कैसी अद्भुत
क़ीमत इसकी वही जानता,
मानवता की ख़ुशबू जिसमें
भारत को जो मातृ मानता !
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