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रविवार, जनवरी 25

बहे अटूट प्रेम की धारा

77वें  गणतंत्र दिवस के अवसर पर 


भारत भू की गौरव गाथा 

आज सुनाने का दिन आया, 

 संविधान का पर्व मनाते

जिसको इस दिन था अपनाया ! 


  पावन संस्कृति अति पुरातन

विश्व साथ दे हर उत्सव में, 

भजन क्लबिंग कर युवा आज के 

भक्तिभाव जगायें उर में !


 वन्य प्रांत भी बढ़ता जाता 

नदियाँ भी नव जीवन पाएँ,

अक्षय ऊर्जा का प्रयोग कर 

ग्लोबल वार्मिंग नित घटाएँ !

 

उत्तर दिशा विराट हिमालय 

सागर तट सुंदर दक्षिण में, 

 भारत की सीमाएँ सुरक्षित 

मार्ग दिखाता नवाचार में, 


 जहाँ कहीं भारतवासी हों

विजयी तिरंगा जब फहराते, 

बहे अटूट प्रेम की धारा 

अनायास ही दिल जुड़ जाते !


विकसित राष्ट्र की नींव डल रही 

दूर बहुत अभी जाना है, 

 पाएँ सभी अधिकार समान 

यही मूल्य नित अपनाना है !


मंगलवार, जनवरी 24

गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाओं सहित

एक ऊर्जा परम लहर बन 


विश्व आज देखे भारत को

 ​​एक नवल इतिहास बन रहा, 

युगों-युगों से जो नायक था

 पुनः समर्थ सुयोग्य सज रहा  !


भारत की परिभाषा क्या है 

नित तेज-प्रकाश खोज में रत, 

अंधकार में डूबी दुनिया 

महामारी व महाआतंक ! 


मिला इसे शुभता का बल नित 

 महाशक्ति हर शिव की पायी , 

एक ऊर्जा परम लहर बन 

कण-कण में जो सदा समायी  !


अब यह आगे बढ़ निकला है 

पथ की हर बाधा को तजकर, 

नहीं थमेगा पूर्व लक्ष्य के 

कर्मशील यह सदा निरंतर !