अभी और यहाँ
क्या तुम हो?
हाँ, इससे कौन इंकार करेगा
अपना होना तो सबने जाना है !
क्या तुम यहाँ हो ?
इसमें शक है
तुम कहीं भी हो सकते हो
चंद्रमा पर, समुद्र के किनारे, बाज़ार में या घर पर !
क्या तुम अभी हो ?
इसमें भी शक है
तुम कल रात में अटके हो सकते हो
या पिछले साल
या दस साल पहले की
किसी बात को याद करके
आज भी रो सकते हो
उतनी ही शिद्दत से !
यहाँ और अभी होने के लिए
बस एक ही शर्त है
अपने केंद्र में रहना सीख लो
तब कहीं और कभी भी रहो
तुम सदा ही
अभी और यहाँ हो !!
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