पूर्णता
कोई चाहता है
कि हम आगे बढ़ें
इसलिए वह रास्ते में
पत्थर रख देता है
कोई चाहता है
कि हम ऊँचा उठें
इसलिए वह पैरों में
बेड़ियाँ डाल देता है
कोई चाहता है
कि हम मुक्त हो जायें
इसलिए वह भीतर प्रेम जगा देता है
कोई चाहता है
हम पूर्ण विकसित हों
इसलिए वह पाहन, बेड़ियाँ, प्रेम
सब के साथ पूर्णता की चाह भी
भर देता है !!
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बहुत अच्छी, सचमुच बहुत ही अच्छी कविता है यह
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