शनिवार, सितंबर 5

शिक्षक दिवस पर शुभकामनाएँ


माँ शारदे 
तू ही तो है पहली शिक्षक 
भाषाविद् व ज्ञान प्रदायिनी, 
मौन सृष्टि में गूँज उठी थी 
स्वर-अक्षर भर तेरी वाणी !

गायन-वादन का दिया ज्ञान 
मनुज का किया दूर अज्ञान, 
परा शक्ति से बन पश्यंती 
 मध्यमा हुई,  वैखरी दान ! 

परम कृपा के हम अभिलाषी 
वाणी मधुर, शुद्ध हो जाये, 
भाषा का विकास हो प्रतिपल
शब्दों में भी मौन समाये !

 

 
 



 

11 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बहुत आभार रवींद्र जी!

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  2. बेहद सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति

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