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अँधियारा
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बुधवार, अप्रैल 9
मिला वही उजियारा बनकर
मिला वही उजियारा बनकर
अँधियारा छंट गया उसी पल
बन याद इक बसी हृदय में
एक गीत की कड़ी सुमधुर !
नयन भिगोये कसक घनी थी
राह नजर नहीं आती थी
मिला वही उजियारा बनकर !
हारा तम हुई विजय उषा की
टूटे बंधन मुक्त हुआ मन
स्वप्नों को भी लगे नये पर !
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