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रविवार, मई 24

ईद मुबारक

ईद मुबारक 


लो फिर आ गयी ईद 
दिखा चांद... मुस्काया अंबर 
दिलों में मचलने लगे कितने ही मंजर 
उन हवाओं के झूले में झूलने लगा मन 
जो लिए आती थीं रमजान के बाद 
ईद मिलन की खुशबुएँ अपने साथ 
पहली अजान पर ही उठ जाना बिस्तर से 
सफेद झक्क कुर्ते में छोटे भाई का सुबह-सुबह सजना 
पकड़ कर उंगली भाईजान की, इबादत को निकल पड़ना 
लहंगों-शरारों को तह देकर अलमारी में सजाना 
वह गले मिलना और दुआ के लिए हाथ बढ़ाना 
वह ईदी देना छोटों को और बड़ों से पाना 
देकर जकात कुबूल करवाना खुदा से रोजा
‘ईद मुबारक’ कह कर हरेक से दुआएं बटोरना !
गाढ़े दूध से सेवइयां बनाकर मेवों से सजाना 
मीठी हो सबकी ईद यह अल्लाह से मनाना !

शुक्रवार, जून 15

ईद के मौके पर एक इबादत


ईद के मौके पर एक इबादत

इक ही अल्लाह, एक ही रब है,
एको खुदाया, उसी में सब है !

अंत नहीं उसकी रहमत का
करें शुक्रिया हर बरकत का,
जो भी करता अर्चन उसकी
क्या कहना उसकी किस्मत का !

जग का रोग लगा बंदे को
‘नाम’ दवा, कुछ और नहीं है,
मंजिल वही, वही है रस्ता
उसके सिवाय ठौर नहीं है !

सारे जग का जो है मालिक
छोटे से दिल में आ रहता,
एक राज है यही अनोखा
जाने जो वह सुख से सोता !

तू ही अव्वल तू ही आखिर
तू अजीम है तू ही वाहिद,
दे सबूर तू नूर जहां का
तू ही वाली इस दुनिया का !

अल कादिर तू है कबीर भी
तू हमीद तू ही मजीद भी,
दाता, राम, रहीम, रहमान
अल खालिक खुदा मेहरबान !

तेरे कदमों में दम निकले
दिल में एक यही ख्वाहिश है,
तेरा नाम सदा दिल में हो
तुझसे ही यह फरमाइश है !

सोमवार, अगस्त 20

ईद मुबारक



ईद मुबारक 

एक ही अल्लाह
एक ही रब है,
एक खुदा है
एक में सब है !

अंत नहीं उसकी रहमत का
करें शुक्रिया हर बरकत का,
उसकी बन्दगी जो भी करता  
क्या कहना उसकी किस्मत का !

जग का रोग लगा बंदे को
नाम दवा कुछ और नहीं है,
वही है मंजिल वही है रस्ता
तेरे सिवा कोई ठौर नहीं है !

सारे जहां का जो है मालिक
छोटे से दिल में आ रहता,
एक राज है यही अनोखा
जाने जो वह सुख से सोता !

तू ही अव्वल तू ही आखिर
तू अजीम है तू ही वाहिद,
दे सबूर तू नूर जहां का
तू ही वाली इस दुनिया का !

अल कादिर तू है कबीर भी
तू हमीद और तू मजीद भी,
दाता है, तू रहीम, रहमान
अल खालिक तू मेहरबान !

तेरे कदमों में दम निकले
दिल में एक यही ख्वाहिश है,
तेरा नाम सदा दिल में हो
ईद पे तुझसे फरमाइश है !