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शनिवार, अप्रैल 12
बुधवार, जून 14
करें सजदा हर कदम पर
करें सजदा हर कदम पर
हर तरफ़ जलवा उसी का
हर तरफ़ उसका ही नूर,
कैसे कोई क़ैद भला
रहे ख़ुद में ख़ुद से दूर !
बीज जैसे खोल में हो
राज मन ऐसे छुपाये,
भीग जाये भावना में
प्रेम का अंकुर उगाये !
एक दिन वह वृक्ष होगा
आस्था के पुष्प धारे,
दे सहारा पंछियों को
रात-दिन जो गीत गायें !
करें सजदा हर कदम पर
क्या हमारे पास अपना,
चार दिन का यह सफ़र है
बीतता ज्यों मधुर सपना !
तू चला है हाथ थामे
सदा ही रहमत बरसती,
तू सँवारे ज़िंदगी को
हर घड़ी जो है बदलती !
शुक्रवार, जून 15
ईद के मौके पर एक इबादत
ईद के मौके पर एक इबादत
इक ही अल्लाह, एक
ही रब है,
एको खुदाया, उसी
में सब है !
अंत नहीं उसकी
रहमत का
करें शुक्रिया हर
बरकत का,
जो भी करता अर्चन
उसकी
क्या कहना उसकी
किस्मत का !
जग का रोग लगा बंदे
को
‘नाम’ दवा,
कुछ और नहीं है,
मंजिल वही,
वही है रस्ता
उसके सिवाय ठौर
नहीं है !
सारे जग का जो है
मालिक
छोटे से दिल में
आ रहता,
एक राज है यही
अनोखा
जाने जो वह सुख
से सोता !
तू ही अव्वल तू
ही आखिर
तू अजीम है तू ही
वाहिद,
दे सबूर तू नूर
जहां का
तू ही वाली इस
दुनिया का !
अल कादिर तू है
कबीर भी
तू हमीद तू ही
मजीद भी,
दाता, राम, रहीम, रहमान
अल खालिक खुदा
मेहरबान !
तेरे कदमों में
दम निकले
दिल में एक यही
ख्वाहिश है,
तेरा नाम सदा दिल
में हो
तुझसे ही यह
फरमाइश है !
सोमवार, अगस्त 20
ईद मुबारक
ईद मुबारक
एक ही अल्लाह
एक ही रब है,
एक खुदा है
एक में सब है !
अंत नहीं उसकी रहमत का
करें शुक्रिया हर बरकत का,
उसकी बन्दगी जो भी करता
क्या कहना उसकी किस्मत का !
जग का रोग लगा बंदे को
नाम दवा कुछ और नहीं है,
वही है मंजिल वही है रस्ता
तेरे सिवा कोई ठौर नहीं है
!
सारे जहां का जो है मालिक
छोटे से दिल में आ रहता,
एक राज है यही अनोखा
जाने जो वह सुख से सोता !
तू ही अव्वल तू ही आखिर
तू अजीम है तू ही वाहिद,
दे सबूर तू नूर जहां का
तू ही वाली इस दुनिया का !
अल कादिर तू है कबीर भी
तू हमीद और तू मजीद भी,
दाता है, तू रहीम, रहमान
अल खालिक तू मेहरबान !
तेरे कदमों में दम निकले
दिल में एक यही ख्वाहिश है,
तेरा नाम सदा दिल में हो
ईद पे तुझसे फरमाइश है !
मंगलवार, जुलाई 24
रोशन रूह को करने का
रोशन रूह को करने का
लो आया फिर पाक महीना
रहमत अल्लाह की पाने,
जीवन में लाकर अनुशासन
बरकत हर घर में लाने !
लाया है रमजान महीना
एक और मौका खिदमत का,
देह को पीछे रख कुछ दिन
रोशन रूह को करने का !
दुनिया रोशन होती आयी
सदा खुदा के बन्दों से,
इक जरिया है शुभ रमजान
कैसे प्रेम जताएं उनसे !
रहमत सदा बरसती आयी
इंसा ही उलझा रहता,
अब खाली होकर जो बैठे
झोली झोली नूर बरसता !
जिम्मेदारी जो भी अपनी
उसकी याद दिलाता है
जिनको जो भी कमी खटकती
औरों से दिलवाता है !
दान, धर्म को दे बढ़ावा
रोजा करता है तन हल्का,
हैं इसकी हजार नेमतें
तोबा करने से मन हल्का !
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