पुनः नमस्कार ! आज ही मैं यात्रा से लौटी हूँ पूरे सत्रह दिन बाद घर आकर व आप सभी से मुखातिब होकर अच्छा लग रहा है. यात्रा में ही लिखी कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत हैं, धीरे-धीरे और भी बहुत कुछ जो कहने से रह गया है व डायरी के पन्नों में भरता गया है, लिखा जायेगा व आपकी पोस्ट भी एक-एक कर पढ़ने का अवसर मिलेगा.
यात्रा
हर यात्रा कड़ी होती है किसी पिछली यात्रा की
और जोड़ती है किसी नई यात्रा से....
हर यात्रा मन को कुछ नया सम्बल दे जाती है
कुछ नए तार जुड़ जाते हैं भीतर
नए हो जाते हैं रिश्ते
समय की गर्त जम गयी थी जिन पर , वे भाव
मिलन का जल पाकर खिल जाते हैं
हर यात्रा हमें आगे ले जाती है
उस महायात्रा पर जाने में बनती है सहायक...
