नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
मिलन
जो ख़ुशबू बन साथ चला है
उस से ही हर ख़्वाब पला है
जीवन का जो सार दे रहा
वही मधुर आधार दे रहा
सीधा-सच्चा जिसका पथ है
मिट जाती हर इक आपद है
सारे शब्द दूर जा बैठे
सुरति जहाँ दिल में आ पैठे
गुंजन कोई गूँज रही है
शुभ प्रकाश की नदी बही है
यामा-दिवस भेद मिटता है
चारों याम मिलन घटता है