मनवा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मनवा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, अप्रैल 12

पल-पल सरक रहा संसार



पल-पल सरक रहा संसार

कौन यहाँ किसको ढूंढे है 
किसे यहाँ किधर जाना है,
खबर नहीं कण भर भी इसकी 
पल भर का नहीं ठिकाना है !

जोड़-तोड़ में लगा है मनवा
बुद्धि उहापोह में खोयी,
हर पल कुछ पाने की हसरत 
जाने किस भ्रांति में सोयी !

दिवास्वप्न निरन्तर देखे 
मन ही स्वप्न निशा में गढ़ता,
नहीं मिला आधार स्वयं का 
लक्ष्यहीन सा रहे विचरता !

एक तिलिस्म महामाया का 
घुमा रहा जिसको करतार
एक व्यूह में भ्रमण चल रहा 
पल-पल सरक रहा संसार !