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मंगलवार, मार्च 28

रामनवमी के पावन पर्व पर

रामनवमी के पावन पर्व पर 


त्रेता युग में प्रकट हुए थे 

 मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम,  

किन्तु आज भी अति ही पावन 

शुभ परम सात्विक जिनका नाम !


खुद अनंत को सांत बनाया 

अनुपम अवतार लिया विष्णु ने, 

किंतु रहे राम नहीं सीमित

भारत भू की सीमाओं में !


राम नाम के मधुर जाप ने 

सारे जग को गुंजाया है , 

हरि अनंत  कथा भी अनंता 

हर युग ने जिसे सुनाया है !


जन्मस्थल पर बनता मन्दिर 

दिव्य स्वप्न अब पूर्ण हुआ है,  

राम राज्य फिर लौटा लाएं   

 बाट देखता वर्तमान यह !


 शुभ मूल्यों की हो स्थापना

 राजाराम चले थे जिन पर,

दुनिया को नव मार्ग दिखाया  

सुत आदर्श, मित्र भाई बन  !


माँ सीता का नाम सदा ही  

वीर राम से आगे लगता,  

सहे कई अपवाद भले ही 

सिया-राम ही जग यह जपता !


सोमवार, मई 10

कोरोना काल

 कोरोना काल 

 यह कैसा युग आया है 

मोबाइल से दूर रहो यह कहते नहीं थकते थे जो 

अब उसी के सहारे उनकी पढ़ाई करवा रहे हैं 

निकट न जाओ दादा-दादी, नाना-नानी के  

बच्चों को यह पाठ सिखा रहे है

जब पॉजिटिव होना दुर्भाग्य पूर्ण है 

और निगेटिव होना ख़ुशी की बात 

जब मिलजुल कर रहना है शिष्टाचार के खिलाफ 

 और आपस में दूरियां बनाना 

समझदारी का निशान

पहले बीमार होने पर लगता था टीका

स्वास्थ्य की गारंटी  है अब इसे  लगवाना

आईसीयू में जाना था अति अफ़सोस का कारण 

आज आईसीयू में बेड मिल गया तो 

सन्तोष की साँस लेते हैं परिजन 

कोरोना काल में बदल ही गए हैं 

कितने मूल्य और शिष्टाचार के मापदंड

 परिजन या मित्र की मिजाजपुर्सी तो दूर रही 

अब कोई नहीं जाता मातम मनाने 

कोरोना ने दिए हैं इतने जख्म 

कि भूल ही गए हैं लोग कब बदला मौसम 

कब छाये आकाश पर बादल सुहाने !


बुधवार, अगस्त 5

राम

राम 


त्रेता युग में जन्मे थे 
मर्यादापुरुषोत्तम राम,  
किन्तु आज भी अति पावन 
परम उनका सुंदर नाम !

अनंत को सांत बनाया 
अवतरित  होकर विष्णु ने, 
ना रहे राम पर सीमित
भारत की सीमाओं में !

राम नाम मधुर जाप ने 
सारे जग को गुंजाया, 
हरि अनंत  कथा अनंता 
हर युग ने गायी  गाथा !

जन्मस्थल पर हो मन्दिर 
स्वप्न आज यह पूर्ण हुआ,  
राम राज्य लौटा लाएं   
वर्तमान बाट देखता !

हो स्थापना  मूल्यों की 
 राजाराम चले  जिन पर,
दुनिया को मार्ग दिखाया  
आदर्श पुत्र, भाई बन  !

सीता का नाम सदा ही  
राम से आगे लगाया,  
सहे अनेक अपवाद भी 

गुरुवार, अगस्त 8

सुषमा स्वराज


सुषमा स्वराज


हमें नाज है भारत की इस बेटी पर
जो जन-जन की आवाज बनी
जिसने पहचाना ही नहीं भारत की आत्मा को
अपने शब्दों से उसे सुंदर आकार दिया
लाखों लोगों के दिलों पर राज किया
जिसका दिल इतना विशाल था
'वसुधैव कुटुम्बकम' की भावना को कर दिया जीवंत
अपने कर्मों से सरहद पार भी अपना प्यार दिया !
माथे पर लाल बड़ी सी बिंदी
और मांग में चमकता सिंदूर
बयाँ कर देते हैं उसके दिल में बसे भारतीय मूल्यों की गाथा
निडर, निर्भीक, प्रतिभाशाली, ओजस्वी, प्रखर वक्ता
राजनीति में नये मानदंडों की संस्थापक
दूरदर्शी, स्नेहमयी एक कुशल प्रशासक
अपने विरोधियों को भी भाई बनाने की कला जिन्हें आती थी
बरसों बाद भी मिलीं हों किसी से उनके नाम से बुलाती थीं
ऐसी हमारी अपनी सुषमा जी को
शत शत नमन
आज देश करता है हाथ जोड़कर उन्हें वन्दन !!



बुधवार, अगस्त 16

फूल ढूँढने निकला खुशबू

फूल ढूँढने निकला खुशबू

पानी मथे जाता संसार
बाहर ढूँढ रहा है प्यार,
फूल ढूँढने निकला खुशबू
मानव ढूँढे जग में सार !

लगे यहाँ  राजा भी भिक्षुक
नेता मत के पीछे चलता,
सबने गाड़े अपने खेमे
बंदर बाँट खेल है चलता !

सही गलत का भेद खो रहा
लक्ष्मण रेखा मिटी कभी की.
मूल्यों की फ़िक्र भी छूटी
गहरी नींद न टूटी जग की !

जरा जाग कर देखे कोई
कंकर जोड़े, हीरे त्यागे,
व्यर्थ दौड़ में बही ऊर्जा
पहुँचे कहीं न वर्षों भागे !

 चहुँ ओर बिखरा है सुदर्शन
आँखें मूँदे उससे रहता,
तृप्त न होता भिक्षु मन कभी
अहंकार किस बूते करता !

हर क्षण लेकिन भीतर कोई
बैठा ही है पलक बिछाये,
कब आँखें उस ओर मुड़ेगीं
जाने कब वह शुभ दिन आये !

मंगलवार, फ़रवरी 28

कब आँखें उस ओर मुड़ेगीं


कब आँखें उस ओर मुड़ेगीं

पानी मथता है संसार
बाहर ढूँढ रहा है प्यार,
फूल ढूँढने निकला खुशबू
मानव ढूँढे जग में सार !

राजा भी यहाँ लगे भिखारी
नेता भी पीछे ही चलता,
सबने गाड़े अपने खेमे
बंदर बाँट का खेल है चलता !

सही गलत का भेद खो रहा
लक्ष्मण रेखा मिटी कभी की.
मूल्यों की कोई बात न करता
गहरी नींद न टूटे जग की !

जरा जाग कर देखे कोई  
कंकर जोड़े, हीरे त्यागे,
व्यर्थ दौड़ में बही ऊर्जा
पहुँचे कहीं न वर्षों भागे !

सत्य चहुँ ओर बिखरा है
आँखें मूंदे उससे रहता,
भिक्षु मन कभी तृप्त न होता
अहंकार किस बूते करता !

हर क्षण लेकिन भीतर कोई
बैठा ही है पलक बिछाये,
कब आँखें उस ओर मुड़ेगीं
जाने कब वह शुभ दिन आये !