मृगतृष्णा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मृगतृष्णा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, जुलाई 29

मृगतृष्णा सा सारा जीवन


मृगतृष्णा सा सारा जीवन


जो भी चाहो सब मिलता है
 माया का जादू चलता है,
फिर भी जीवन उपवन सूना
दिल का फूल कहाँ खिलता है !

रूप रंग है कोमल स्वर भी
थमकर देखें समय कहाँ,
सपनों का इक नीड़ बनाते
नींद खो गयी चैन गया !

अरमानों को बड़ा सहेजा
चुन-चुन कर नव स्वप्न संजोये,
बिखर गये सूखे पत्तों से
 बरबस ही फिर नयन भिगोये !

कदमों में आशा भर दौड़े
हाथों में था गगन समाया,
किंतु दूर ही रहा क्षितिज सम
मुट्ठी में कुछ भी न आया !

मृगतृष्णा सा सारा जीवन
पार नहीं इसका मिलता है,
मन मयूर भी सदा डोलता
ज्यों लहरों में शशि हिलता है !