दिया जो पहले मिला वही
जो खाली है वही भरा है
सच ही सच ! न झूठ जरा है,
जो दिखता है.. वही नहीं है
नजर न आता वही वही है !
धरा दौड़ती.. थामे सबको
थिर दिनकर यात्री बनता,
दिया जो पहले मिला वही
मिटा यहाँ जो.. बचा वही !
शब्दों से प्यास नहीं
बुझती,
नदिया पर जाना होता है,
पिंजरे से गगन नहीं मिलता
नभ में ही गाना होता है !
