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मंगलवार, अगस्त 18

दिया जो पहले मिला वही

दिया जो पहले मिला वही


जो खाली है वही भरा है
सच ही सच ! न झूठ जरा है,
जो दिखता है.. वही नहीं है
नजर न आता वही वही है !

धरा दौड़ती.. थामे सबको
थिर दिनकर यात्री बनता,
दिया जो पहले मिला वही
मिटा यहाँ जो.. बचा वही !

शब्दों से प्यास नहीं बुझती,
नदिया पर जाना होता है,
पिंजरे से गगन नहीं मिलता
नभ में ही गाना होता है !