अनोखा शिल्प
उस दिन एक शिल्प देखा
नीचे कूल्हे से लेकर दो पैर हैं माटी के
ऊपर छाती से सिर तक का भाग है
बीच का पेट गायब है
ऐसा दृश्य यदि दिखे तो क्या बताता है
गरीब का पेट पीठ से लग गया है
इसलिए गायब है
अमीर का इतना बड़ा हो गया है
कि लाखों की संपत्ति भी कम पड़ जाती है
वह बाहर निकल आया है
और शरीर का भाग नहीं लगता
यही तो आदमी को कोल्हू की तरह घुमाता है
रोज भरना होता है उसे
एक कुएं की तरह है पेट
जिसमें पेंदी नहीं है
पेट सीमित हो अपने सही स्थान पर
तभी पूर्ण हो सकेगा वह शिल्प
जिसमें कूल्हे के नीचे पैर हैं और
छाती के ऊपर सिर
पर मध्य का स्थान खाली है !

