वसंत पंचमी
खिले कुसुम महकी अमराई
मधु वासंती पवन बही है,
ऋतुराजा का स्वागत करने
क़ुदरत सारी निखर रही है !
सरसों फूली खलिहानों में
कण-कण जीवंत हुआ भू का,
प्रीत जगाये रस अंतर में
नव उमंग नव भरे ऊर्जा !
सृष्टि में संगीत संजोने
स्वरदेवी का हुआ अवतरण,
कर वीणा तारों को झंकृत
ज्ञान ज्योति का किया प्रस्फुटन !
सृष्टि में संगीत संजोने
जवाब देंहटाएंस्वरदेवी का हुआ अवतरण
शुभकामनाएं
शुभकामनाएं
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