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शुक्रवार, मई 1

आज मजदूर दिवस है

आज मजदूर दिवस है 


आएं, श्रम का हम सम्मान करें 
कर्मठ मजदूरों का मान करें 
जिनके बल पर बनती हैं सड़कें 
महल-दुमहले उठ जाते नभ में देखते-देखते 
हजारों मीलों तक रेलों की पटरियां बिछतीं
बीहड़ जंगलों से जो गुजरतीं 
कूप गहरे तेल के या जल के भी हों 
खोदने में पल भर की ना देरी लगाते 
खेत-खलिहान में काम जुटे रात-दिन  
धूप-वर्षा, शीत लहर सहते
आज वे बेघर हुए या घरों से दूर 
महामारी के सताये 
जाने कैसा जीवट उनके मनों की 
गहराई में वास करता 
नहीं,  संभव नहीं कि,  कभी उनके 
श्रम का प्रतिदान कुछ हम दे सकें 
कम से कम अदम्य साहस सराहें 
देखकर अप्रतिम योगदान उनका 
देश के चहुँमुखी विकास में 
आज कर्मवीर कहकर पुकारें !

सोमवार, अप्रैल 20

कौन हैं वह

कौन हैं वह 

सिंह जैसा शौर्य पाया है 
माँ जैसी करुणा अंतर में, 
 धैर्य धरे दृढ चट्टानों सा
प्रामाणिकता है शब्दों में ! 

अन्याय कभी सहन न होता  
दीनों की रक्षा हित आए,
सारे जग में डंका बजता
दोष शत्रु भी ढूंढ न पाए !

जन-जन को आधार दिया है 
भारत का सम्मान बढ़ाया,
लेने पड़े कठोर निर्णय पर 
मस्तक पर इक बल न आया !

कर्मठ जैसे वीर योद्धा
प्रहरी सजग समर्पित सेवक, 
कौन बखाने व्यक्तित्व महान 
निज स्वार्थ को आये तजकर !

उर में जग कल्याण भावना 
सारा जग ही लोहा माने, 
आशा भरी हुई नजरों से 
जैसे उनकी ओर निहारे !