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गुरुवार, जनवरी 29

यदि मेरे हाथों में शासन की बागडोर हो

यदि मेरे हाथों में शासन की बागडोर हो
 
.....तो खोल डालूं पांच सितारा होटल के द्वार
उन निर्धन मजदूरों के लिये
जिन्होंने कड़ी धूप में तपकर खड़े किये थे
 वे गगनचुम्बी महल....
 
और दूर दराज के गावों में
जहाँ न सड़के हैं न बिजली
रहने को भेज दूँ मोटे-मोटे खादी धारियों को...
 
आलीशान बंगलों में
खाली पड़े हैं जो, सन्नाटा गूंजता है जहाँ
स्कूल और अस्पताल चलाऊँ
विवश हैं जो लम्बी कतारों में लगने को
उनको वहाँ दाखिला दिलाऊँ...
 
मिलावट करने वाले हों या कालाबाजारी
भेज दूँ उनको, उनकी सही जगह
और मेहनतकश, कर्मठ हाथों को
ईमानदारी से शुद्ध सामान बेचने में लगा दूँ...
 
जो भूल गए हैं ड्यूटी पर आना
ऐसे अध्यापकों, डाक्टरों, अधिकारियों या पायलटों को
रिटायर कर दूँ किसी भी उम्र में
और काम करने को आतुर लोगों की
रिटायरमेंट उम्र बढा दूँ जितनी वे चाहें....
 
जहरीली दवाएं और जहरीली खादें 
धरती को विषैला न बनाएँ
ऐसा फरमान निकालूं
विकलांग न हों जिससे
दूषित भोजन को खाकर और बच्चे...
 
टीवी पर आने वाले झूठे विज्ञापनों के जाल से
मुक्त करूं आम जनता को
बढ़ावा मिले योग और सात्विकता को
हर बच्चे की पहुँच हो
संगीत व नृत्य तक
पेड़ लगाना अनिवार्य हो जाये
हर बच्चे के जन्म पर....
 
विज्ञान के साथ-साथ
साहित्य पढ़ने वाले विद्यार्थी भी
उच्च पदों पर आयें
कलाविहीन मानव
पशु रूप में और न बढ़ने पाएँ...
 
गर्व हो अपनी संस्कृति पर ऐसे
मंत्री बनाऊँ
सरकारी ठेके की दुकानों पर दूध-लस्सी की
नदियाँ बहाऊँ...
 
ख्वाब तो यही है कि
न हो अन्याय किसी के साथ
हर किसी के पास हो
सम्मान से जीने का अधिकार...
 

बुधवार, नवंबर 30

जागरण


 जागरण 

सोयी हुई देशभक्ति भी 
जाग  रही है दिल में सबके,
खोयी हुई आस्था जागी 
मूल्यों के प्रति हर अंतर में !

तप कर सोना कुंदन बनता 
जनता तप हेतु तैयार,
घण्टों पंक्ति में लगकर भी 
कम न होता दिल में प्यार !

भारत नए दौर में पहुँचा 
नई ऊर्जा नई  लहर है,
पारदर्शिता लेन-देन में 
नई चेतना डगर-डगर है !

 नहीं  रुकेगी यह यात्रा 
अब स्वर्णिम युग की आहट  है 
जो न इसके संग चल रहे 
उन कदमों में घबराहट है !

दुनिया देखे परिवर्तन को  
देश नई करवट लेता है,
नव गति, नव उल्लास समेटे 
'सत्यमेवजयते' गाता  है !






बुधवार, नवंबर 16

बदल रहा है देश

बदल रहा है देश

लोग निकल रहे हैं घरों से
छोटे-बड़े सब समान होकर खड़े हैं लम्बी-लम्बी कतारों में
जिन्हें एक नहीं कर पाये सद उपदेश और भगवान
उन्हें एक ही कतार में ले आया है इस देश का संविधान
आखिर प्रधानमन्त्री को चुना है जनता ने
उसका संवैधानिक हक है
जनता को जागरूक बनाना
देश से भ्रष्टाचार मिटाना
अब किसी को हिम्मत नहीं होगी
नोटों से भरे तिजोरी
या फिर बेहिसाब कमाई में से करे कर चोरी
अब इस देश का कोई माईबाप है
जिसको देना हर किसी को जवाब है
देश बदल रहा है
हमको भी बदलना है
न कि ‘सब चलता है’ का मन्त्र जपना है
अब यहाँ बेईमानी नहीं चलेगी
अभी तो गंदगी फ़ैलाने वालों की नकेल भी कसेगी
स्वच्छ भारत का सपना अब हकीकत बन रहा है
वाकई देश बदल रहा है !

शुक्रवार, दिसंबर 6

नेता और नाता

नेता और नाता



नेता का जनता से अटूट नाता है
पर कोई बिरला ही इसे निभाता है
जनता ने उसे चुना
अपनी आवाज बनाया
निश्चिन्त हो गयी
अपने स्वप्नों को उसे सौंप
पर नेता का नाता
टूट गया जनता से उसी वक्त
जब उसे राज सिंहासन दिखा
सत्ता पर विराजते ही
शोर प्रतीत होने लगी
 जनता की पुकार
स्वर भर लिए चाटुकारों के
अपने कानों में उसने
उड़ने लगा आकाश में
सुख-सुविधाओं का चश्मा लगाये आँखों पर
जनता, जो पहले उसके पीछे चलती थी
बुलेट प्रूफ शीशों के पीछे धकेल दी गयी  
किसी और नेता की प्रतीक्षा में
बैठी है फिर आँखें बिछाए जनता...




रविवार, अगस्त 28

मैं भी अन्ना तू भी अन्ना



मैं भी अन्ना तू भी अन्ना


सोये हुए जन-जन में अन्ना
फूंक चेतना की चिंगारी,
आत्मशक्ति के बल पर तुमने
भारत की तस्वीर संवारी !

रोटी से न जीता मानव  
स्रोत ऊर्जा का है भीतर,
दिखा दिया संसार को सारे
इतने दिनों तक जल ही पीकर !

संसद में हुई चर्चा अविरत
भ्रष्टाचार मिटाना होगा,
भ्रमित न होगी अब जनता
 लोकपाल बिठाना होगा !

कोई तो हो ऐसा जिसको
पीड़ित जन फरियाद कर सकें,
रक्षक जो भक्षक बन बैठे
उनसे वे निजात पा सकें !

न्यायालय में न्याय कहाँ है
पैसे में बिकता कानून,
कॉलेजों में सीट नहीं हैं
निगल गये भारी डोनेशन !

राशन हो या गैस कनेक्शन
सब में गोलमाल चलता है,
ऊपर से नीचे तक देखें
भ्रष्टाचार यहाँ पलता है !

नेता भी बिकते देखे हैं
ऑफिसर बेचें ईमान,
घोटाले पर घोटाला है
नई पीढ़ी होती हैरान !

कोई ऐसा क्षेत्र बचा न
जहां स्वच्छ काम होता है,  
महँगाई तो बढती जाती
 सबका हाल-बेहाल होता है !

अन्ना ने मशाल जलाई
जाग गया है हिंदुस्तान,
झांक के अपने भीतर देखे
बने आदमी हर इंसान !

थोड़े से सुख सुविधा खातिर
गिरवी न रखेंगे आत्मा,
नई पीढ़ी यह सबक ले रही
अनशन पर बैठा महात्मा !

अन्ना का यह तप अनुपम है
देश का होगा नव निर्माण,
रोके न रुकेगा यह क्रम
करवट लेता हिंदुस्तान !