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सोमवार, सितंबर 25

यह तू तो नहीं

यह तू तो नहीं


कहीं कुछ ऐसा नहीं 

जहाँ नज़र ठहर जाये 

दिल के मोतियों को लुटाता चल 

कि यह दामन भर जाये

हर सुकून भीतर ही मिला 

जब भी मिला 

बाहर फूलों के धोखे में 

काँटों से पाँव छिलवाये 

ख़ुद पे यक़ीन कर 

ख़ुदा में छिपा है ख़ुद 

वह यक़ीन ही छू सकता उसे 

 जर्रे-जर्रे में जो मुस्कुराए 

तू खुश है ही बेवजह 

जैसे दुनिया की वजह नहीं 

तलाश ख़ुशियों की 

बेमज़ा ज़िंदगी को बनाती जाये 

तेरे दामन में हज़ार 

ख्वाहिशें लिपटीं 

उतार फेंक इसे क्योंकि 

यह तू तो नहीं, बताती जाये ! 


बुधवार, जुलाई 14

मौन

मौन 

एक नज़र ही काफ़ी है 

किसी के दिल का हाल जानने के लिए 

एक मुस्कान भरा आश्वासन 

एक शांत मुद्रा 

शब्दों की एक सीमा है 

जो नि:शब्द को पढ़ लेता है 

वह मुक्ति की तरफ कदम बढ़ा रहा है 

प्रकृति चुप रहकर भी मुखर है 

चाँद हजार सालों से बातें करता है प्रेमियों से 

हवा कानों में कुछ कह जाती है 

नदी बोलती है 

पेड़ और पुष्प भी 

हम भूल गए हैं चुप्पी की भाषा

दिन भर कानों में लगाए इयरफोन 

दिल की आवाज़ भी नहीं सुन पाते 

परम मौन है 

उसे मौन में ही सुना जाता है !