नया दिन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
नया दिन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, जुलाई 4

नया जब दिन उगा

नया जब दिन उगा


नूतन उच्छ्वास भरें
श्वासों में हर्ष के,
नया सा दिन उगा
वृक्ष पर वर्ष के !

आशा कुम्हलायी जो
बंधी अभी छोर में ?
 लिए बासी मन जगे
क्यों कोई भोर में ?

ताजा समीर बहे
क्षमता भी बढ़ी है,
कल से आज तलक
उम्र सीढ़ी चढ़ी है !

जैसा भी हो समय
नया उत्कर्ष हो,
हँसी की गूंज सदा
बीते दिन अमर्ष के !

नया जब दिन उगे  
वृक्ष पर वर्ष के !