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बुधवार, मई 20

गाँठ सभी खोल लो


गाँठ सभी खोल लो
  

एक वर्ष और बीता
गठरी न बांधो और
जाने कब चलना हो
अंतिम हो कौन भोर ?

हल्का ही मन रहे
सफर जाने कैसा हो,
गाँठ सभी खोल लो
कौड़ी न पैसा हो !

एक ही लगन रहे
जाना है उसी देश,
कोई जहाँ तके राह
भटके बहुत परदेश !