अद्भुत बड़ी कृष्ण की लीला
मथुरा रोयी होगी उस दिन
कान्हा चले जब यमुना पार,
जिस धरती पर हुए अवतरित
दे नहीं पायी उन्हें दुलार !
अभी तपस्या की बेला है
बारह वर्षों की प्रतीक्षा,
लौट करेंगे कृष्ण किशोर
कंस के कृत्य की समीक्षा !
अभी तो गोकुल जाते कान्ह
नन्द, यशोदा को हर्षाने,
ग्वालों, गैयों, साथ खेलने
संग गोपियों रास रचाने !
माखन चोरी, मटकी फोड़ी
असुर-वध किये नित नव लीला,
मनहर नृत्य, बाँसुरी वादन
ब्रज वासी कान्हा रंगीला !
पलक झपकते बीता बचपन
मथुरा जाने का दिन आया,
तड़पा हर ब्रज वासी का उर
नन्द यशोदा को तड़पाया !
राधा की आँखें बरसीं थीं
विरहा की पीड़ा थी भारी,
अद्भुत बड़ी कृष्ण की लीला,
अब तक सारी दुनिया वारी !


