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शुक्रवार, सितंबर 4

कृष्ण जन्माष्टमी पर

कृष्ण जन्माष्टमी पर

काल सुहाना बन आया था
भादों की अष्टमी आयी,
जगी दिशाओं में भी आशा
मंगलमयी भूमि हर्षाई !

नदियाँ भी आनंद से भरीं
सरवर खिले उत्प्लों से थे,
अग्नि प्रज्वलित हुई प्रसन्न हो,
वायु भरी स्नेह सुरभि से !

कारागार में जन्मे थे स्वयं
मुक्त किया जग भव बन्धन से
था नक्षत्र रोहिणी पावन
प्रकटे रस नन्द नन्दन थे !

थी मध्य रात्रि घोर अँधेरा
बनकर आये ज्यों दिनमान,
अद्भुत रूप धरा कृष्णा ने
कोमल काया कमल समान !

कानों में झिलमिल कुंडल
मोर पंख केशों में सज्जित,
अंग-अंग है सुंदर जिसका
ऐसे श्यामल महिमा मंडित !

दिव्य जन्म व कर्म दिव्य हैं
मुरली मनोहर मधुमय कृष्णा,
मिलन और विरह दोनों में
याद भी उनकी सुख स्वरूपा !

बुधवार, सितंबर 1

कृष्ण जन्माष्टमी

कृष्ण जन्माष्टमी 

मथुरा रोयी होगी उस दिन, कृष्ण चले जब यमुना पार 
जिस भूमि पर हुए अवतरित, न दे पायी उन्हें दुलार I 

अभी तपस्या की बेला है, बारह वर्षों की प्रतीक्षा 
लौट करेंगे कृष्ण किशोर, कंस कृत्य की समीक्षा I 

अभी तो गोकुल जाते कान्हा, नन्द यशोदा को हर्षाने 
ग्वालों, गैयों, संग खेलने, संग गोपियों रास रचाने I 

माखन चोरी, मटकी तोड़ी, असुर-वध नित नयी लीला 
मधुर वचन, बांसुरी वादन, ब्रज वासी कृष्ण रंगीला I 

पलक झपकते बीता बचपन, मथुरा जाने का दिन आया 
तड़पा हर ब्रज वासी का उर, नन्द यशोदा उर घबराया I 

राधा की आँखें बरसीं विरह की पीड़ा थी भारी 
अद्भुत थी कृष्ण की लीला, अब तक सृष्टि है वारी I 

अनिता निहालानी 
१ सितम्बर २०१०

रविवार, अगस्त 29

कृष्ण जन्माष्टमी



कृष्ण जन्माष्टमी 


बुद्धि हमारी देवकी मानस है वसुदेव

दोनों का शुभ मिलन बने आनंद का गेह !


तन यह कारागार है अहंकार है कंस

पंचेंद्रियाँ पहरा दें भीतर बंदी हंस !


पहरेदार सोए इन्द्रियाँ हुईं उपराम

मन बुद्धि में लीन हुआ भीतर प्रकटे श्याम !


आसक्ति कालिंदी है जाना गोकुल धाम

छूटे मन का राग तो  मिल जाय घनश्याम !