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रविवार, अगस्त 10

राखी


राखी



छुपाये है कितनी कोमल भावनाएं
रेशम के धागों से बनी
ये रंगीन राखियाँ !
गागर में सागर भरा हो जैसे
या बादलों में अमृत
अथवा तो फूलों में सुवास !
समेटे है अनगिनत स्मृतियाँ
अपने रंगीन नाजुक आकार में
 सजती है जब किसी कलाई पर
आलोड़ित हो जाता है उर
उग आते हैं
कितने सुमनों के उपवन
सूर्य और चन्द्रमाओं के समान
देदीप्यमान हो जैसे कोई राजा
और छाया हो उसका प्रताप चहूँ ओर...या
सुकोमल नवनीत सा पिघल जाता हो
हर स्पंदन
मुबारक हो बार-बार
राखी का यह त्योहार
यह रक्षा बंधन !


मंगलवार, अगस्त 20

रक्षा बंधन के उत्सव पर हार्दिक शुभकामनायें

राखी


कोमल सा यह जो धागा है
कितने-कितने भावों का
समुन्दर छुपाये है
जिसकी पहुंच उन गहराइयों तक जाती है
जहाँ शब्द नहीं जाते
शब्द असमर्थ हैं
जिसे कहने में
कह देता है राखी का रेशमी सूत्र
सम्प्रेषित हो जाती हैं भावनाएं
बचपन में साथ-साथ बिताये
दिनों की स्मृतियों की
गर्माहट होती है जिनमें
वे शरारतें, झगड़े वे, वे दिन जब एक आंगन में
एक छत के नीचे एक वृक्ष से जुड़े थे
एक ही स्रोत से पाते थे सम्बल
 एक ही ऊर्जा बहती थी तन और मन में
वे दिन बीत गये हों भले
पर नहीं चुकती वह ऊर्जा प्रेम की
 वह प्रीत विश्वास की
खेल-खिलौने विदा हो गये हों
पर नहीं मरती उनकी यादें
उनकी छुअन  
रक्षा बंधन एक त्योहार नहीं
स्मृतियों का खजाना है
हरेक को अपने बचपन से
बार-बार मिलाने का बहाना है
और जो निकट हैं आज भी
उनकी यादों की अलबम में
एक नया पन्ना जोड़ जाना है