शिकायत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शिकायत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, फ़रवरी 18

जो झर रहा है आहिस्ता से


जो झर रहा है आहिस्ता से

जब वह पकड़ लेता है कलम अपने हाथों में 

तो झर-झ र झरते हैं शब्द अनायास ही 

वरना छोटे पड़ जाते हैं सारे प्रयास ही 

छोड़ दो उसकी राह में 

अंतर के सारे द्वन्द्व 

बात ही न करो सीमित की 

वह अनंत है 

रास नहीं आती उसे शिकायतें 

वह तो बहना चाहता है 

ऊर्जा का..  उल्लास का..  सागर बनकर रगों में 

जो ‘है नहीं’ उसकी चर्चा में सिर खपाना क्या 

जो ‘है’ उसका गुणगान करो 

जो छिपा है पर नजर नहीं आता उसे महसूस करना है 

जो झर रहा है आहिस्ता से 

उसे कण -कण में भरना है 

वह जीवन है विशाल है 

अपना मार्ग खुद बनाएगा 

उसे हाथ पकड़कर चलाने की जरूरत नहीं है 

वह तुमको राह दिखाएगा 

अनूठा है उसका सम्मान करो 

न कि व्यर्थ ही जीवन में व्यवधान भरो ! 


 

शुक्रवार, जुलाई 7

यहाँ दो नहीं हैं


यहाँ दो नहीं हैं

हर बार जब मैंने तुम्हें चाहा है
खुद को ही पसंद किया है
हर बार जब तुम्हारी किसी बात को सराहा है
अपनी पीठ थपथपाई है
हर कोई खुद से प्यार करे
तो कितनी हसीन हो जाये यह दुनिया
हर बार जब मैं तुम से दूर हुई
खुद से ही दूर हुई हूँ
हर शिकायत जो मैंने तुमसे की है
दरअसल वह अपने आप से की है
हर शूल जो मैंने तुम्हें चुभोया है
मेरे ही दिल में घाव बनकर कसक दे गया है
यहाँ हर कोई खुद से ही मुखातिब है
हम स्वयं को नहीं चाहते  
और इल्जाम दूसरों पर लगाये जाते हैं
खुद को सीधे-सीधे सता भी तो नहीं सकते
किसी के द्वारा खुद को सताये जाने का
इंतजाम भी खुद ही कर लेते हैं
यहाँ दो नहीं हैं
तुमसे जुड़ी हर बात खुद से ही जुड़ी थी
यहाँ केवल तुम ही तुम हो या केवल मैं ही मैं
यहाँ दो नहीं हैं ! 

मंगलवार, फ़रवरी 11

कुछ बातें दिल से

कुछ बातें दिल से


शिकायतें कर लीं बहुत जमाने से
सिर कहीं अब तो झुकाया जाये

बोझ ढोयें अच्छाइयों का कब तक
चलो औरों को बेहतर बताया जाये

नेकियाँ कर के भी रोये बुराई कर के भी
आखिर इन्सान को किस तरह हंसाया जाये

उमगती ख्वाहिशें सताती दिलोजान को
  किसी के दर पे उनको चढ़ाया जाये

नेमतें सौंप दे तो बढ़ती ही जाएँगी
कर के अर्पण दुःख को भी घटाया जाये

मुगालता हो गया हासिल कुछ करने का
वरना क्या है जो रब को दिखाया जाये

न कुछ अपना न कुछ हस्ती है हमारी
जान इस सच को जरा मुस्कुराया जाये