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शनिवार, फ़रवरी 9

सरहद पर बर्फीले पर्वत



सरहद पर बर्फीले पर्वत



कण-कण में भारत धरती के
बहता एक शाश्वत सँजीवन,
दूर पूर्वी अंचल में जब
उगती नभ में अरुणाभ, नमन !

सरहद पर बर्फीले पर्वत
कहीं सिंधु, रेतीले निर्जन
रक्षित करने को तत्पर है
सेनानी का तन मन अर्पण !

जयहिन्द मधुर नाद गूँजता
अंतर में हिलोर इक उठती,
नदिया, पर्वत, कानन, अम्बर
हर कोने को छू विहंसती !

पुण्य भूमि यह पुण्य शील है
राम, कृष्ण, बुद्धों की आभा,
गंगा, कावेरी, सतलज से
सिंचित है जन-जन की आशा !

आज नवल रवि दस्तक देता
कोटि-कोटि भाारतवासी को,
 पुरुषार्थ कर इसे संवारें
अवसर मिलता सौभागी को !