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सोमवार, जनवरी 24

तुम्हें याद करता है भारत

तुम्हें याद करता है  भारत 


‘जयहिंद’ का नारा गूंजा 

जाग उठे थे भारतवासी

नहीं सहेंगे पराधीनता

लगने दो चाहे फांसी !


तुम भारत के पुत्र अनोखे 

फौलादी दिल को था ढाला

खून के बदले ही आजादी 

मिल सकती यही कह डाला !


बापू के थे निकट खड़े तुम 

फिर भी उनके साथ थे लड़े

दिल झुकता था उन कदमों पर 

कर्तव्य बुलाते कहीं बड़े !  


कैसे अद्भुत सेनानी थे 

साम्राज्य से भिड़ने निकले

‘दिल्ली चलो’ का नारा दे 

संग सेना ले लड़ने निकले !


भारत गौरवान्वित तुमसे 

‘आजाद हिंद फ़ौज’ निर्माता

कभी-कभी ही किसी हृदय में 

इतना बल साहस भर पाता !


तुम्हें याद करता है  भारत 

अचरज से भरी निगाहों से

जिस माटी में तुम खेले थे 

ध्वनि आती है उन राहों से !


‘जय हिंद’ की एक पुकार पर 

हर भारतवासी डोल उठे

 देशभक्ति जो सोयी भीतर 

ले अंगड़ाई किलोल उठे !


शनिवार, फ़रवरी 9

सरहद पर बर्फीले पर्वत



सरहद पर बर्फीले पर्वत



कण-कण में भारत धरती के
बहता एक शाश्वत सँजीवन,
दूर पूर्वी अंचल में जब
उगती नभ में अरुणाभ, नमन !

सरहद पर बर्फीले पर्वत
कहीं सिंधु, रेतीले निर्जन
रक्षित करने को तत्पर है
सेनानी का तन मन अर्पण !

जयहिन्द मधुर नाद गूँजता
अंतर में हिलोर इक उठती,
नदिया, पर्वत, कानन, अम्बर
हर कोने को छू विहंसती !

पुण्य भूमि यह पुण्य शील है
राम, कृष्ण, बुद्धों की आभा,
गंगा, कावेरी, सतलज से
सिंचित है जन-जन की आशा !

आज नवल रवि दस्तक देता
कोटि-कोटि भाारतवासी को,
 पुरुषार्थ कर इसे संवारें
अवसर मिलता सौभागी को !