मंगलवार, जुलाई 25

पुरनम सी यह हवा


पुरनम सी यह हवा


तेरा पता मिला है औरों से क्या मिलें

पहुँचेंगे तेरे दर अरमान ये खिलें


तुझे छू के आ रही पुरनम सी यह हवा

सब को मेरी दुआ से मिलने लगी शफा


जब से यह बाँधा बंधन थम सा कुछ गया 

माटी का तन तपाया कंचन ह्रदय हुआ 


 दुनिया का सच आखिर आ गया है सम्मुख

फानी है सब जहाँ सुख या कि कोई दुःख


दिल यह मिला है ख़ुद से जब से मिले नयन

पहले पहल थी चिनगी भभकी हुई सघन


जलते हुए जगत में शीतल किया है मन

कैसी अनोखी ज्वाला बुझने लगी तपन


10 टिप्‍पणियां:


  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 26 जुलाई 2023 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
    अथ स्वागतम शुभ स्वागतम।
    >>>>>>><<<<<<<

    जवाब देंहटाएं