सोमवार, जून 22

दिन-एक उपहार


दिन-एक उपहार  

 मिला है 

उपहार की तरह 

दिन आज का

लिपटा हुआ 

एक चमकीले आवरण में 

हम मुग्ध हैं उसी पर 

खोलना नहीं चाहते 

रख देते हैं आलमारी में 

रंगीन पैकेट्स में बंद 

पड़े हैं जहाँ कई 

अनखुले उपहार पहले के 

यदि खोल दिया होता 

एक नया दिन उपहार की तरह 

जाने क्या निकला होता 

भर देता उल्लास से

 हमारे अंतर को 

या किसी और के 

अगर थमा देते उसे ही 

स्वयं के लिए कुछ करें या औरों के 

बात तो एक ही है 

यहाँ सभी जुड़े हैं भीतर से 

ग्रह अलग-अलग हों ब्रह्मांड में

 आकाश तो एक ही है !


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