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मंगलवार, मार्च 13

उम्मीद



उम्मीद 



उम्मीद है कि दुनिया एक दिन यही कहेगी 
इंसानियत सिखाये भारत की परम भूमि 

कश्मीर के जवां फिर भारत के साथ होंगे 
जन्नत बनेगा फिर से अमनोहवा बहेगी 

दिलों में बनी जो दूरी घाव की पीर ताजी
पुरनम हुईं जो आँखें फिर झूम के हँसेंगी  

केसर गुलाब महकें अंतर में ख्वाब दहकें  
जिनके उजाले में फिर धरती हरी खिलेगी 

उम्मीद की शमा को दिल में जलाये रखना 
कितन घना तमस हो सुबह नव किरण उगेगी 

कश्मीरियों के दिल में उतना ही चैन होगा 
जितनी हमारे दिल से धारा उधर बहेगी 

मंगलवार, सितंबर 23

हँसना यहाँ गुनाह है


हँसना यहाँ गुनाह है



लगा दो पहरे खुशियों पर
क्यों मनुआ बेपरवाह है
हँसना यहाँ गुनाह है !

खुश रहना क्योंकर सीखा है
यह तो गमों की बस्ती है,
आँसूं ही भाते हैं जग को
नहीं हँसी की हस्ती है !

पर काट दो उम्मीदों के
क्यों उड़ने की चाह है
हँसना यहाँ गुनाह है !

पलकों पर क्यों पुष्प सजाये
अविरत पीड़ा बहने दो,  
मुखर हुए क्यों नयन बोलते
चुप ही इनको रहने दो !

पुनः बांध लो जंजीरों को
लम्बी अति यह राह है
 हँसना यहाँ गुनाह है !