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बुधवार, जनवरी 28

मन की बात

मन की बात


मन की बात कही आपने,
मन की बात सुनी सभी ने !

सुन कर इसको गुनना होगा,
स्वप्न नया फिर बुनना होगा !

सबको सम अधिकार मिलेंगे,
जब बेटा बेटी दोनों खिलेंगे !

प्रगतिशील बनेगा जन जन,
शक्ति प्रकटेगी हर तन मन !

दुनिया के दो गणतन्त्र मिल,
राह दिखायें पा लो मंजिल !

विश्व बने सबका परिवार,
प्यार बढ़े न हो तकरार !

निज भूमिका सभी निभाएं,
जीवन को इक पर्व बनाएं !


शुक्रवार, जनवरी 25

गणतन्त्र दिवस पर शुभकामनाओं सहित


गणतन्त्र 

भारत एक स्वप्न है
परमात्मा का...
युगों पूर्व देखा गया
गणदेवता, गणपति व
स्वप्न गणनायक का.. !
जहाँ समानता हो
स्त्री और पुरुष में
निर्धारित हों भले ही
अधिकार क्षेत्र उनके !
भय नहीं प्रेम जहाँ
राज्य करे दिलों पर
न हो सम्मानित कोई अन्यायी
कभी भारत भू पर !
संवेदनाएं फलें फूलें
शुभता हो जागृत
ऐसी जहाँ हवा चले  
हर जीवन का हो स्वागत !
विकास नित मूल्यों का
रचे जाएँ मानवता के कीर्तिमान
धन नहीं, ज्ञान का हो सम्मान !
विश्वगुरु भारत बने
पथप्रदर्शक, ज्योति दीपक
आत्मा में रत रहे !
हो लक्ष्मी जहाँ हर गृह स्वामिनी..
जिए अपनी गरिमा में
अधिकार हो अपने तन पर
हर स्त्री को, अपनी कोख पर
इस स्वप्न को हमें सत्य बनाना है
सेवा और त्याग को
फिर से जिलाना है
सादगी को अपनाना है
तभी सत्य होगा यह स्वप्न
तभी गणतन्त्र बनेगा भारत !