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सोमवार, अगस्त 24

धरती सदा लुटाती वैभव

 

धरती सदा लुटाती वैभव

 

धरती हर तन को धारे है 

वसुधा तप से प्राणी हैं थिर, 

पृथ्वी का आकर्षण बाँधे

भूमि में ही मिलेंगे इक दिन ! 

 

छिपे धरा में मोती-माणिक 

नदियाँ बहतीं हिम शिखरों से, 

रुधिर नाड़ियों में संचारित 

अनगिन राज छिपे नर तन में !

 

भू भ्रमण चले अपने धुर पर  

परिक्रमा रवि की भी करती, 

तन भी मुड़-मुड़ देखे खुद को 

प्रदक्षिणा सविता मेधा की !

 

धरा स्थूलतम टिकी सूक्ष्म पर 

देह भी मन के रहे आश्रित, 

मन में मृत यदि जीवन आशा 

कर देता है इसे विखण्डित !

 

धरा शुद्ध हो कुसुम खिलाये 

शुभ सुंदर लावण्य लुभाये, 

नयन हँसे रोम-रोम पुलकित 

गालों पर गुलाब खिल जाएँ ! 

 

महाभूत यह महादेव का 

धरती सदा लुटाती वैभव, 

कैसे यह उपकार चुकेगा 

सदा बिखेरे करुणा सौरभ !

 

 

शुक्रवार, सितंबर 4

कृष्ण जन्माष्टमी पर

कृष्ण जन्माष्टमी पर

काल सुहाना बन आया था
भादों की अष्टमी आयी,
जगी दिशाओं में भी आशा
मंगलमयी भूमि हर्षाई !

नदियाँ भी आनंद से भरीं
सरवर खिले उत्प्लों से थे,
अग्नि प्रज्वलित हुई प्रसन्न हो,
वायु भरी स्नेह सुरभि से !

कारागार में जन्मे थे स्वयं
मुक्त किया जग भव बन्धन से
था नक्षत्र रोहिणी पावन
प्रकटे रस नन्द नन्दन थे !

थी मध्य रात्रि घोर अँधेरा
बनकर आये ज्यों दिनमान,
अद्भुत रूप धरा कृष्णा ने
कोमल काया कमल समान !

कानों में झिलमिल कुंडल
मोर पंख केशों में सज्जित,
अंग-अंग है सुंदर जिसका
ऐसे श्यामल महिमा मंडित !

दिव्य जन्म व कर्म दिव्य हैं
मुरली मनोहर मधुमय कृष्णा,
मिलन और विरह दोनों में
याद भी उनकी सुख स्वरूपा !

रविवार, जनवरी 26

गणतन्त्र दिवस पर हार्दिक शुभकामनायें

गणतन्त्र दिवस पर हार्दिक शुभकामनायें


अमृत बरसे है अम्बर से
सूर्य देव को करें प्रणाम,
धरती पर नदियाँ, झीलें
पुण्य धरा सींचें दिन-याम !

संतों की है दीर्घ श्रंखला
 परम सत्य भी यहीं मिला,
योग-संख्य, वेदांत अनूठे
पुष्प भक्ति का यहीं खिला !  

हिम पर्वत से धुर दक्षिण तक
सदियों से गुंजित हैं गान,
धन्य-धन्य स्वयं को मानें हम
भारत की जो हैं सन्तान !

अद्भुत भाषाएँ, बोलियाँ
वेश, खाद्य भी हैं अनगिन,
एक सूत्र बाँधें है सबको
एक भाव बहता निशदिन !

वीर बाँकुरे भारत भू के
सीमाओं पर हैं तैनात,
खलिहानों में कृषक चेतना
श्रम अकूत करती दिन-रात !

उत्सव आज मनाएं मिलकर
सुखमय हो यह विश्व कुटुंब,
गणतन्त्र दुनिया का अनोखा
जहाँ वंशी, गीता व कदम्ब !

लहर उठी है अब क्रांति की
जाग उठा है हर इक जन,
भारत की आत्मा प्रमुदित है
पुलकित है हर जन गण मन !