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शनिवार, मार्च 2

जिन्दगी का गीत मिलकर


जिन्दगी का गीत मिलकर


सादगी हो जिन्दगी में
दिलों में थोड़ी शराफत,
दिन कयामत अगर आये
खुशदिली से करें स्वागत !

नफरतों की बात ना हो
दूरियां मिट जाएंं दिल से,
प्यार के किस्से कहेंं फिर
फूल बन मुस्काएं खिल के !

'शुक्रिया' हर साँस में हो
 हर दिल से बन दरिया बहे,
इश्क की ही जीत होगी
हर शब्द अपना यह कहे !

सुख की ही चाहत जगे न 
दुःख से न नजरें चुराएँ,
जिन्दगी का गीत मिलकर
हर जुबां में गुनगुनाएं !

आज दिल में उठे ख्वाहिश
 दोस्ती हो जंग ना हो,
खूबसूरत इस जहाँ में
बेरुखी का रंग न हो !

मंगलवार, मार्च 19

ठिठक गयी कोयल की कूक



ठिठक गयी कोयल की कूक


मुरझाई सी आम्र मंजरी
ठिठक गयी कोयल की कूक,
जाने कौन निगोड़ी आकर
गई कान में उसके फूँक !

कैसे घोलें रंग अनूठे
भीगा-भीगा सा मौसम है,
पिचकारी भी सहमी सी है
गुब्बारों पर बैन लगा है  !

नफरत के कुछ रंग डालते
कुछ दहशत आतंक बांटते,
कुछ को दौलत रंगी लगती
ताकत, सत्ता, रक्त मांगते !

ऐसे में क्या होगा फाग
लगी हुई है द्वेष की आग,
शायद होली उसे बुझाये
सोये हैं जो जाएँ जाग !