होली के रंगों में जाने
सभी भाव जल गये द्वेष के
मन उजले-उजले हो आये ,
जिस पर फिर प्रियतम ने आकर
मदिर अबीर-गुलाल लगाये !
निखर गये हैं रूप सलोने
अंतर ज्यों आश्वस्त हुए हैं,
होली के आने से देखो
आज ह्रदय मदमस्त हुए हैं !
सभी नज़र आते हैं अपने
आज एक भी नहीं पराया,
होली के रंगों में जाने
छुपा कौन सा राज अनोखा !
दूर-दूर ही रहते थे जो
आज बने हैं सब हमजोली,
मिलकर सभी मनाने आये
प्रीत रंग की सुंदर होली !
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