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बुधवार, जून 14

करें सजदा हर कदम पर

करें सजदा हर कदम पर 


हर तरफ़  जलवा उसी का 

हर तरफ़ उसका ही नूर, 

कैसे कोई क़ैद भला 

रहे ख़ुद में ख़ुद से दूर !


बीज जैसे खोल में हो 

राज मन  ऐसे छुपाये,  

भीग जाये भावना में 

प्रेम का अंकुर उगाये !


एक दिन वह वृक्ष होगा 

आस्था के पुष्प धारे, 

दे सहारा  पंछियों को

रात-दिन जो गीत गायें !


करें सजदा हर कदम पर 

क्या हमारे पास अपना, 

चार दिन का यह सफ़र है 

बीतता ज्यों मधुर सपना !


तू चला है हाथ थामे 

सदा ही रहमत बरसती, 

तू सँवारे  ज़िंदगी को 

हर घड़ी जो है बदलती ! 


बुधवार, मई 29

उसको खबर सभी की



उसको खबर सभी की

खोया नहीं है कोई भटका नहीं है राह
अपने ही घर में बैठा बस घूमने की चाह

जो दूर से भी दूर और पास से भी पास
ऐसा कोई अनोखा करता है दिल में वास

उसको खबर सभी की जागे वह हर घड़ी
कोई रहे या जाये बाँधे नहीं कड़ी

इक राज आसमां सा खुलता ही जा रहा
वह खुद ही बना छलिया खुद को सता रहा

नजरों से जो बिखरता उसका ही नूर है
कहता दीवाना दिल वह कितना दूर है

कोई फूल फूल जाकर मधुरस बटोरता है
मीठी सी इक डली बन वह राह जोहता है

सोमवार, जनवरी 9

ये नजरें कहीं और टिकती नहीं


ये नजरें कहीं और टिकती नहीं  



तू नूर है हम नूर को चाहने वाले
अब अंधेरों से अपनी तो निभती नहीं

कहाँ छिपा सका तू खुद को पर्दे में
तुझसे तेरी खुदाई यह छिपती नहीं

बन के आँसू तू ही तो नहीं छलका
ऐसी ठंडक तो पहले मिली ही नहीं

माँ के हाथों सा छूके यह झोंका गया
तेरी धुन जैसी लोरी सुनी न कहीं

तेरी चाहत का ऐसा सरूर छा गया
इन कदमों की थिरकन थमती नहीं  

तेरे दर पे जो आया वहीं रह गया
ये नजरें कहीं और टिकती नहीं