करें सजदा हर कदम पर
हर तरफ़ जलवा उसी का
हर तरफ़ उसका ही नूर,
कैसे कोई क़ैद भला
रहे ख़ुद में ख़ुद से दूर !
बीज जैसे खोल में हो
राज मन ऐसे छुपाये,
भीग जाये भावना में
प्रेम का अंकुर उगाये !
एक दिन वह वृक्ष होगा
आस्था के पुष्प धारे,
दे सहारा पंछियों को
रात-दिन जो गीत गायें !
करें सजदा हर कदम पर
क्या हमारे पास अपना,
चार दिन का यह सफ़र है
बीतता ज्यों मधुर सपना !
तू चला है हाथ थामे
सदा ही रहमत बरसती,
तू सँवारे ज़िंदगी को
हर घड़ी जो है बदलती !


