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रविवार, फ़रवरी 8

शुभकामना

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,

आज ही इस वर्ष की पहली यात्रा पर निकलना है, सो आने वाले शिवरात्रि के पर्व के लिए शुभकामना के साथ दो सप्ताहों के लिए विदा.

महाशिवरात्रि

ब्रह्मा रचते, विष्णु पालक, हे शिव ! तुम हो संहारक
तीनों देव बसें मानव में तीनों जन-जन उद्धारक !

किन्तु आज शक्ति के मद में, भुला दिये मूल्य मानव ने
स्व-विनाश की करे व्यवस्था, जगह देव की ली दानव ने !

दुरूपयोग सृजन शक्ति का, व्यर्थ आणविक अस्त्र बनाये
पंचतत्व को करता दूषित, अपनी बुद्धि पर इतराए !

पालन करना भूल गया वह, विष्णु को है दिया सुला
असुरों का ही खेल चल रहा, देवत्व को दिया भुला !

हे शिव ! प्रकटो, मृत हो कण-कण, नव जीवन पुनः पाये
सड़ा गला जो भी है बासी, हो पुनर्गठित खिल जाये !

हे काल पुरुष ! हे महाकाल ! हे प्रलयंकर ! हे अभयंकर !
कर दो लीला, जड़ हो चेतन व्यापे विप्लव, हे अग्निधर !

सदियों से जो लगी समाधि, तोड़ नेत्र खोलो अपना   
कल्याणमय हे शिव शम्भु ! परिवर्तन न रहे सपना !  

तुम महादेव ! हे देव देव ! कर तांडव सृष्टि को बदलो
जल जाये लोभ का असुर आज, चेतना अंतर की बदलो !

हे पशुपति ! पशुत्व मिटाओ मानव की गरिमा लौटे
अज्ञान मिटे, अमृत बरसे गुमी हुई महिमा लौटे !

सर्प धर ! हे सोमेश्वर ! प्रकटो हे सौम्य चन्द्रशेखर !
मुंडमाल, जटा धारी, हे त्र्यम्बकम ! हे विश्वेश्वर !

तुम शमशान की राख लपेटे वैरागी भोले बाबा !
हे नीलकंठ ! गंगाधारी ! स्थिर मना, हे सुखदाता !

तुम करो गर्जना आज पुनः, हो जाये महा प्रलय भीषण  
हे बाघम्बर ! डमरू बोले, हो जाये विलय हर एक दूषण !  

शुभ शक्ति जगे यह देश बढ़े सन्मार्ग चलें हर नर-नारी
हे अर्धनारीश्वर ! हे महेश ! हे निराकार ! हे त्रिपुरारी !

धर्म तुम्हारा सुंदर वाहन, नंदी वाहक ! हे रसराज !  
हे अनादि ! अगम ! अगोचर ! काल भैरव ! हे नटराज !

मंगलवार, जुलाई 10

जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाएं


यह कविता उन सभी युवाओं को समर्पित है जिनका जन्मदिन आज है और जो घर से दूर हैं.

जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाएं

सहज आत्मविश्वास झलकता
ज़ज्बा कुछ कर दिखलाने का,
भीतर-बाहर एक हुआ मन
नहीं भाव है टकराने का !

सुखद प्रेम की अभिव्यक्ति है
खिला-खिला ज्यों कोई कमल, 
एक ऊर्जा सघन है भीतर
व्यक्त हुआ हर भाव अमल ! 

लक्ष्य दिख रहा चंद कदम पर
पथ भी उज्ज्वल है जिसका,
एक अटूट निष्ठा भी मन में
भाग्य साथ दे क्यों न उसका !

निर्भयता की डोर थाम कर
कितने घाव सहे तन पर,
सबल हुआ विश्वासी अंतर
कितने दंश सहे मन पर !

एक ही बाधा है जीवन में
मनमानी न मन कर पाए,
कभी स्वाद कभी मौज का
कर बहाना नहीं चलाए !

खुद को मालिक जान के रहना
मन के न फिर जाल में फंसना,
खुद से ही शक्ति मिलती है
बाहर के भ्रम में न रहना !

जन्मदिवस पर यही कामना
अपनी शक्ति को पहचानो,
निर्भर होना उस पर सीखो
तन को इक मंदिर मानो !

बुधवार, जनवरी 25

गणतन्त्र दिवस की शुभकामनायें !


गणतन्त्र दिवस की शुभकामनायें !


तिरंगा सुनाता है अपनी कहानी
 राजा है इसमें न ही कोई रानी,
शहीदों के खूं से लिखी यह गयी है
हजारों की इसमें छुपी क़ुरबानी !

गुलामी का दर्द भयानक बड़ा था
घुट घुट के जीते थे शासन कड़ा था, 
आजादी की शमा जब जली लहराती  
तिरंगा गगन में ऊँचा उड़ा था !

बापू ने इसमें भरे रंग प्यारे
चरखा बना चक्र, संदेश धारे,
बढ़ते चलें तोड़ बाधायें पथ की
मंजिल सदा दे, आशा पुकारे !

केसरिया सुनाये साहस की गाथा 
हरियाला भारत स्वप्न सजाता,  
सच्चाई, शांति का संदेशा देकर   
तिरंगा दिलों में आकांक्षा जगाता !

शुक्रवार, दिसंबर 30

शुभ हो नया वर्ष




शुभ हो नया वर्ष

चलो एक बार फिर
करें स्वागत नव वर्ष का !
यूँ तो सृष्टि हर क्षण नयी है
उपजती है, मिटती है
उमडती है, गिरती है
बनती है पल-पल अपनी गरिमा में
कुछ और ही...
नहीं था हिमालय का उत्तंग शिखर लाखों वर्ष पूर्व
आज जहाँ है मरुथल, बहती थी जलधार वहाँ
वहाँ आज कंटक हैं...जहाँ फूलों की घाटियाँ थीं कभी  
रूप और आकार बदलते हैं
बदलती हैं चेहरे की रेखाएं भी
नेताओं के भविष्य भी, देशों की सीमाएं भी....

एक वर्ष में भी बदल जाता है बहुत कुछ
चलो एक बार फिर
कुछ वायदें करें खुद से
अपनी सम्भावनाओं को तलाशें
बीज जो मचल रहा है भीतर
फूल बनने को
उसे उचित खाद और जल से सींचें
सुनें दिल की ज्यादा
जब दिमाग कहे शॉर्टकट अपनाने को
दे दिलाकर कुछ अपना काम निकलवाने को....

चलो एक बार फिर
करें यकीन अच्छाई पर
कुछ पेड़ लगाएं
धरती को हरा-भरा छोड़ जाने के लिये
और मत व्यक्त करें
जब चुनाव आएँ...
चलो नववर्ष का करें स्वागत...