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शुक्रवार, मार्च 14

जीवन इक मधुरिम उत्सव है

होली की शुभकामनाएँ 


फागुन मास भरे उल्लास 

पूनम का चाँद जगाये याद, 

उड़ते रंग भरते उमंग 

अबीर, गुलाल, मिटायें मलाल !


मीठी गुझिया भुजिया तीखी

लपट अगन की लौ लगन की, 

छाया वसंत हुआ शीत अंत 

मन मोर थिरक भरे एक ललक !


यह राग-रंग धुन मस्ती की 

बस याद दिलाने ही आती, 

जीवन इक मधुरिम उत्सव है 

कुदरत की हर शै यह गाती !


गुरुवार, मार्च 21

होली के रंगों में जाने

होली के रंगों में जाने 

 सभी भाव जल गये द्वेष के 

मन उजले-उजले हो आये , 

जिस पर फिर प्रियतम ने आकर 

मदिर अबीर-गुलाल लगाये !


निखर गये हैं रूप सलोने  

अंतर ज्यों आश्वस्त हुए हैं, 

होली के आने से देखो 

आज ह्रदय मदमस्त हुए हैं !


सभी नज़र आते हैं अपने 

आज एक भी नहीं पराया, 

होली के रंगों में जाने 

छुपा कौन सा राज अनोखा !


दूर-दूर ही रहते थे जो 

आज बने हैं सब हमजोली, 

मिलकर सभी मनाने आये 

प्रीत रंग की सुंदर होली !


मंगलवार, मार्च 19

अगन होलिका की है पावन




अगन होलिका की है पावन

बासंती मौसम बौराया
मन मदमस्त हुआ मुस्काया,
फागुन पवन बही है जबसे
अंतर में उल्लास समाया !

रंगों ने फिर दिया निमंत्रण
मुक्त हो रहो तोड़ो बंधन,
जल जाएँ सब क्लेश हृदय के
अगन होलिका की है पावन !

जली होलिका जैसे उस दिन
जलें सभी संशय हर उर के,
शेष रहे प्रहलाद खुशी का
मिलन घटे उससे जी भर के !

उड़े गुलाल, अबीर फिजां में
जैसे हल्का मन उड़ जाये,
रंगों के जरिये ही जाकर
प्रियतम का संदेशा लाए !

सीमित हैं मानव के रंग
पर अनंत मधुमास का यौवन,
थक कर थम जाता है उत्सव
चलता रहता उसका नर्तन !