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शुक्रवार, दिसंबर 30

नए तराने गाएँ मिलकर

नए तराने गाएँ मिलकर 


नए वर्ष में आओ ! साथी  

 नए-नए हो जाएँ खिलकर,

नया सृजन हो, नए गीत कुछ 

नए तराने गाएँ मिलकर  !


नए विचारों से महकाएँ, 

आंगन अपने बासी  मन का

नए भाव  से भरें हृदय को, 

दामन ख़ुशियों से  जीवन का !


नई सोच हो, हृदय  मुक्त हो,

 सभी पूर्वाग्रह से अब तो,

नई कोंपलें फूटें उर में, 

नए रास्ते खोजें अब तो !


नए शब्द हों, नए इरादे,

 नया-नया हो क्रम जीवन का,

नई पुलक हो, नव उमंग हो, 

नया राग हो नादाँ मन का !


नए साल में, नए ताल में,

 नया-नया सुर वादन छेड़ें,

नई थाप हो, नई धुनें हों, 

नूतन अंतर प्रीत उलेड़ें !


अब तक सच माना था जिसको,

 परखें उस अपने जीवन को,

जो असत्य हो, झट से तज दें, 

झिझके नहीं हृदय  पल भर को !


शुक्रवार, जनवरी 12

कदमों में भी राहें हैं



कदमों में भी राहें हैं

अभी जुम्बिश भुजाओं में
कदगों में भी राहें हैं,
अभी है हौसला दिल में
गंतव्य पर निगाहें हैं !

परम  दिन-रात रचता है
जगती नित नूतन सजती,
नींदों में सपन भेजे
जागरण में धुनें बजतीं !

चलें, हम थाम लें दामन
इसी पल को अमर कर लें,
छुपा है गर्भ में जिसके
उसे देखें, नजर भर लें !

अभी झरने दें शब्दों को
प्रस्तर क्यों बनें पथ में,
सृजन का स्रोत है अविचल
बहाने दें सहज जग में !

अभी मुखरित तराने हों
विरह के भी प्रणय के भी,
किसी के अश्रु थम जाएँ
वेदना  से विजय के भी !

नहीं रुकना नहीं थमना
अभी तो दूर जाना है,
जिसे अपना बनाया है
उसे जग में लुटाना है !