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गुरुवार, जून 18

वही एक है

वही एक है



एक मधुर धुन वंशी की ज्यों
एक लहर अठखेली करती,
एक पवन वासन्ती बहकी
एक किरण कलियों संग हँसती !

एक अश्रु चरणों पर पावन
एक दृष्टि हर ले जो पीड़ा,
 एक परस पारस का जैसे
एक शिशु करता हो क्रीड़ा !

एक परम विश्राम अनूठा
एक दृश्य अभिराम सजा हो,
एक स्वप्न युगों तक चलता  
एक महावर लाल रचा हो !

एक मन्त्र गूँजे अविराम
एक गीत लहरों ने गाया,
एक निशा सोयी सागर पर
एक उषा की स्वर्णिम काया !

बुधवार, जुलाई 30

कितनी मधुर कहानी है


कितनी मधुर कहानी है


हर सुख की इक कीमत है
 दुःख पाकर ही चुकती है,
बस आनन्द निशुल्क बंट रहा  
मुक्ति यहाँ सहज मिलती है !

हर वस्तु की इक कीमत है
श्रम से ही पायी जाती है,
केवल खुदा ही मुफ्त यहाँ पर
नेमत सहज बरसती है !

हर सम्मान की इक कीमत है
पा अपमान चुकानी है,
बस अमान ही पाने योग्य
कितनी मधुर कहानी है !

हर लक्ष्य की इक कीमत है
खट-खट कर कोई पहुंचे ,
बस धैर्य मंजिल पर लाये   
 मिल जाती है बिन माँगे !