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बुधवार, जुलाई 30

कितनी मधुर कहानी है


कितनी मधुर कहानी है


हर सुख की इक कीमत है
 दुःख पाकर ही चुकती है,
बस आनन्द निशुल्क बंट रहा  
मुक्ति यहाँ सहज मिलती है !

हर वस्तु की इक कीमत है
श्रम से ही पायी जाती है,
केवल खुदा ही मुफ्त यहाँ पर
नेमत सहज बरसती है !

हर सम्मान की इक कीमत है
पा अपमान चुकानी है,
बस अमान ही पाने योग्य
कितनी मधुर कहानी है !

हर लक्ष्य की इक कीमत है
खट-खट कर कोई पहुंचे ,
बस धैर्य मंजिल पर लाये   
 मिल जाती है बिन माँगे !  

गुरुवार, अप्रैल 26

दृश्य नहीं वह द्रष्टा है


दृश्य नहीं वह द्रष्टा है
  
वह कैद नहीं है मंदिर में
दृश्य नहीं वह द्रष्टा है,
 नाम-रूप में बंध न सके
सृष्टि नहीं वह सृष्टा है !

झांक रहा इन नयनों से
श्रवणों से शब्द वही धारे,
कोमलतम स्पर्श उसी से हैं
उससे ही भाव उठे सारे  !

वह बन विद्युत तन में दौड़े
मन-प्राण उसी के बल पर हैं,
वह सहज सदा रहता भीतर
दूरी न हमसे पल भर है !

उसमें विश्राम करे कोई
सँवर गया निज दर्पण में,
पल भर भी ध्यान धरे कोई
खो जाता दिल की धड़कन में !

ज्यों बालक माँ से विमुख हुआ
बस खेल खिलौनों से खेले,
जीवन की उथल-पुथल कैसी
वह देख रहा कुछ न बोले !

वह देखे ही जायेगा, गर
हम रुक कर उसको न चीन्हें
है धैर्य, बड़ी करुणा उसमें
निजता को तिल भर न छीने !