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बुधवार, जून 28

हर बार

हर बार 


हर संघर्ष जन्म देता है सृजन को 

अत: भागना नहीं है उससे 

चुनौती को अवसर में बदल लेना है 

कई बार बहा ले जाती है बाढ़ 

व्यर्थ  अपने साथ 

और छोड़ जाती है 

कोमल उपजाऊ माटी की परत खेतों में 

तूफ़ान उड़ा ले जाते हैं धूल के ग़ुबार 

और पुन: सृजित होता है नव निर्माण 

जीवन जैसा मिले 

वैसा ही गले लगाना है 

उस परमात्मा को 

हर बहाने से दिल में बसाना है 

जो पावन है वही शेष रहेगा 

मायावी हर बार चला ही जाएगा 

जैसे मृत्यु ले जाएगी देह 

पर आत्मा तब भी निहारती रहेगी ! 


शनिवार, सितंबर 14

लड़कियाँ

लड़कियाँ



बड़ी समझदार, थोड़ी नादान
खुद से अनजान, करतीं पहचान
वर्तमान और भविष्य की
कड़ी लड़कियाँ !

हवा सी तेज, पानी सा बहाव
 हिरनी सी चाल, डाली सा झुकाव
चुनौती दें आँखों से हर  
घड़ी लड़कियाँ !

चेहरों पे ओज, कांधे पे बोझ
ऊँची चढाइयाँ तय करें रोज
हंसती खिलखिलाती सी
 लड़ी लड़कियाँ !

अंतर में प्यार, हिम्मत अपार
 बिखरे जहाँ को, दे पल में संवार
 धरती की अंगूठी में
 जड़ी लड़कियाँ !

सोमवार, मई 14

पले वहाँ विश्वास का मोती


पले वहाँ विश्वास का मोती


संभल संभल के चलने वाला
गिरने से तो बच जायेगा,
गिरकर भी जो संभल गया
उसका गौरव न पायेगा !

पूर्ण बने कोई इस जग में
इसकी नहीं जरूरत उसको,
हृदय ग्राही, निष्ठावान हो
मंजिल की चाहत हो जिसको !

दोराहे हर मोड़ मिलेंगे
मुँह बाएं है खड़ी चुनौती,
हंसकर झेले तब जो उसको
पले वहाँ विश्वास का मोती !

नहीं परीक्षा लेता रब भी
जिसके कदमों में न बल है,
ठोंक-पीट कर उसको देखे
जिसमें बढ़ने का सम्बल है !

जिसको ऊपर ही जाना है
मुड़-मुड़ कर न पीछे देखे,
इस उलझन में गिर सकता वह
जिसकी राह में सुंदर लेखे !