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शनिवार, सितंबर 27

भरोसा

भरोसा 


कहीं विश्वास की कमी 

कहीं अंधविश्वास 

दोनों ही मंज़िल तक पहुँचने नहीं देते !


जिस पर विश्वास नहीं किया 

वह पीछे छूट जाता है

किया जिस पर अंधविश्वास 

वह काम नहीं आता है !


व्यक्ति खड़ा रह जाता है 

मँझदार में 

अब प्रतीक्षा के सिवा 

कोई उपाय नहीं !


यदि भरोसा पक्का होता 

तो वही बचा ले जा सकता था 

फिर अंधविश्वास की

 ज़रूरत ही नहीं पड़ती !


स्वयं के पुरुषार्थ पर अविश्वास 

और भाग्य पर अंधविश्वास 

यही तो लोग करते हैं ! 



शुक्रवार, मई 28

भीतर रस का स्रोत बहेगा

भीतर रस का स्रोत बहेगा 


छा जाएं जब भी बाधाएं 

श्रद्धा का इक दीप जला लें, 

दुर्गम पथ भी सरल बनेगा

जिसके कोमल उजियाले में !


एक ज्योति विश्वास की अटल  

अंतर्मन में रहे प्रज्ज्वलित, 

जीवन पथ को उजियारा कर 

कटे यात्रा होकर प्रमुदित !


कोई साथ सदा है अपने 

भाव यदि यही प्रबल रहेगा, 

दुख-पीड़ा के गहन क्षणों में 

भीतर रस का स्रोत बहेगा !


श्रद्धालु ही स्वयं को जाने 

कैसे उससे डोर बँधी है,

भटक रहा था अंधकार में 

अब भीतर रोशनी घटी है !


जिसने भी यह सृष्टि रचाई 

दिल का इससे क्या है नाता,

एक भरोसा, एक आसरा

जीवन में अद्भुत बल भरता !