उन सभी बच्चों के नाम जिनका आज जन्मदिन है और जो घर से दूर हैं
सुख की फसल भीतर खिले
है गगन सीमा तुम्हारी
उसके पहले मत थमो,
बिखरी हुईं मन रश्मियां
इक पुंज अग्नि का बनो !
जब नयन खोले थे यहाँ
अज्ञात थी सारी व्यथा,
कुछ खा लिया फिर सो गए
इतनी ही थी जीवन कथा !
फिर भेद मेधा के खुले
सारा जगत पढ़ने को था,
थी हर कदम पर सीख कुछ
हर दिवस बढ़ने को था !
अनन्त है सभी कुछ यहाँ
अभाव केवल भ्रम ही है,
सीमित इसे हमने किया
मंजिल कदम-कदम ही है!
खुद का भरोसा नित करो
मन में न भय कोई पले,
है स्वप्न में जन्नत अगर
सुख की फसल भीतर खिले !
दूर घर से देश से भी
जन्मदिन पर लो दुआएं,
नव वर्ष बीते सुख भरा
मिल सभी यह गीत गाएं !



