सोमवार, अक्टूबर 11
भू से लेकर अंतरिक्ष तक
मंगलवार, मई 11
शिक्षा को मूल्यों से भर लें
शिक्षा को मूल्यों से भर लें
अंतरिक्ष तक जा पहुँचा है
अनगिन तारा मण्डल खोजे,
सागर की गहराई नापी
किन्तु हुआ बेबस नर सोचे !
भेद दिया परमाणु मनुज ने
विनाशकारी बम बरसाया,
लाखों लोगों को इक पल में
मृत्यु के आँचल में सुलाया !
सूक्ष्म की ताकत अपरिमित है
मानव से बढ़ कौन जानता,
सूक्ष्म तरंगों के बल पर ही
वर्ल्ड वाइड वेब रच डाला !
किन्तु सूक्ष्म से लड़ना होगा
इसकी शायद खबर नहीं थी,
चिकित्सा पद्धति की सीमा है
इस तत्व पर नजर नहीं थी !
अभी नहीं था अवगत इससे
सूक्ष्म जगत भी एक यहां है,
जीवाणु, विषाणु भी अनेकों
जिनका बहुत प्रकोप सहा है !
अब भी जाग सकें तो जागें
जीवन में परिवर्तन कर लें,
झुकें परम शक्ति के सम्मुख
शिक्षा को मूल्यों से भर लें !
मंगलवार, अक्टूबर 27
हम और अस्तित्व
हम और अस्तित्व
हम वह वृक्ष
बन सकें
जो हजारों
का भला करता है
छाँव देता
और उनकी क्षुधा हरता है
या बनें
बाँसुरी जो खाली है भीतर से
पर अस्तित्व
के अधरों से लगकर
मधुर संगीत
जिससे उपजता है
हमारे भीतर
से हम जब लुप्त हो जाते हैं
सारा संसार
समा जाता है
हवाएं बहने
लगती हैं
शक्ति का
प्रवाह ऊपर से गिरता है
जैसे शंकर
की जटाओं में सिमट जाती है गंगा
बहती है
वह जग की तृषा हरने
गौरी धरती
है भीषण काली का रूप
सहना होगा
जिसे असुरों का आक्रमण
हजार विरोध
भी, पर वहाँ कोई नहीं होगा
जो अपमानित
हो सके तिल भर
हमें भी
बनना होगा मसीहा
छोटा या
बड़ा
क्योंकि
अंतरिक्ष समेटे है हर कोई अपने भीतर !



